dayra

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Friday, 9 December 2011

काव्य जगत....

हर प्रयास पर उमड़ता विश्वास ,
हर बात पर जीत के जज्बात ;


ये खेल है कोमल शब्दों का 
कलमों से खेला जाता है 
मन के उन्मुक्त भावों को .....!!!

कल्पना के प्रवाहों को 
पन्नों पर उढेला जाता है ....!!!

शब्दों की नाजुक कलियों पर 
भवरों सा मंडरा मंडरा कर 
फूलों सा खिलाया जाता है ...!!!

मधुबन में बड़े जतन से 
एक एक फूल इकट्टा कर 
दुनिया को मधु पिलाया जाता है ...!!!

मिटती लहरों की निशानियों को 
रेत पर उभरी कहानियों को ;
शब्दों में में उतरा जाता है ...!!!

सागर के खारे पानी को 
देवों पर चढ़ाया जाता है .....!!!

अंगारों की क्या बात करे 
पत्थर के टुकड़ों को 
चमकते हीरों में सवारा जाता है .....!!!

ये काव्य जगत है प्यारे ,
यहाँ सूरज को भी पानी में डुबोया जाता है ....!!!