dayra

Monday, 20 February 2012

जिंदगी कभी कभी !!!


आवारा आवारा सी हो गयी है तू ;
कभी हसती तो कभी रूठ जाती है !!
मै एक डगर तो दूजी चुन लेती है तू ;
जिंदगी कभी कभी इनी बेवफा क्यों है तू ?


बेखबर अनजानी सी हो गयी है तू ;
सवालों सी सच्ची जवाबों सी झूटी ,
वादों सी पक्की ख्वाबों सी कच्ची ;
जिंदगी सच्ची झूटी सी फिर भी प्यारी सी क्यों है तू ??

भूली    बिसरी  सी  कभी  मिसरी  सी  हो  गयी  है  तू ; 
भूलना  चाहू   जिन  लम्हों  को  फिर  याद  दिलाती  है !
और याद करना चहुँ तो रुलाती है तू ;
जिंदगी तू कभी कभी इतनी न्यारी क्यों  है ? 

प्यारी प्यारी सी हो गयी है तू ,
चाहत सी खिल जाती है चेहरे पर ;
कभी धुन बनकर लबों पर थिरकती नजर आती है तू !
मोहनी मूरत सी छा जाती है आँखों में ;
जिंदगी कभी कभी इतनी प्यारी क्यों है तू ?

कभी  वादें  करती  है  साथ  निभाने  के , 
हर मुस्किल में मेरी और हाथ बढाती है !
कभी माँ जैसे गौदी में उठा लेती है ;
तो बाबा की तरह कंधे पर चड़ा लेती है ;
दादी सी पल्लू की गाठे खोलती है !
कभी नानी सी प्यारी बातें बोलती है तू ;
जिंदगी कभी कभी तू इतनी अपनी क्यों है !

कभी दूर ले आती है अपनों से ;
मिला लती है सपनों से ;
रंगीन कभी बेरंग लगती है ;
कभी शुरुवात कभी आखरी शाम लगती है !
फुरसत में भारी कभी तू बेगानी लगती है !
जिंदगी व्यस्त व्यस्त सी हो गयी है तू ;
एक बात तो बता तू जैसी भी है !
इतनी प्यारी क्यों है ???

15 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति, बेहतरीन सुंदर रचना.....
    शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!
    MY NEW POST ...सम्बोधन...

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  2. जिंदगी सचमुच प्यारी है...कितना कुछ तो दिया है इसने..
    बहुत सुन्दर रचना...

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  3. ज़िंदगी से प्यार करो तो ये ऐसी ही लगती है ...सुंदर अभिव्यक्ति

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  4. isi ko jindgi khte hai.... bahut achcha...

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  5. वाह ...बहुत ही बढि़या।

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  6. बहुत सुन्दर रचना।

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  7. बहुत सुन्दर रचना...

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  8. कभी शुरुआत कभी आखरी शाम लगती ---अति सुन्दर अशोक जी

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  9. waah bahut sunder dear, sach me bahut umda likhahai aapne .badhai

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  10. आपने तो हर आम इन्सान की ज़िन्दगी के हर पल को इस कविता में समेट
    लिया है सच में बहुत ही सुन्दर लफ्जो में हर पहलू को दर्शाया है

    " अति सुन्दर "

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  12. behatareen rachana ke liye badhai birala ji sath hi holi pr shubh kamanayen

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  13. सुंदर रचना As always love reading your poetry

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  14. बहुत ही सुन्दर और प्यारी रचना..
    भावनाओं की कोमलतम अभिव्यक्ति...
    :-)

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  15. हर इंसान पे खरी उतरती ...जिंदगी तू इतनी भारी क्यों है

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