dayra

Sunday, 1 January 2012

I Am भारतवर्ष !!

मैंने  अपने आँचल में आग सुलगते देंखी है !
अपने बेटो की लाशों को फंदों पे लटकते देंखी है !
आंदोलनों की आंच में हड्डीया चिट्कते देंखी है !
मै  भारत  वर्ष  हूँ !!


देखा है मैंने अपने ही साये को बटते;
अपने बेटों को काटते अपने ही बेटों को कटते देखा है !
हर धर्मं को अपने आँचल ने पाला है मैंने ;
इन्ही धर्मान्धो को मेरी गोद उजाड़ते देखा है !
मै भारतवर्ष हूँ !! 

मंगल पाण्डेय की ललकार, लक्ष्मीबाई की तलवार को देखा है !
मैंने देखा है खुदीराम का मेरी आन पर मिट जाना;
अशफाक का इमान देखा है !
मै भारतवर्ष हूँ !!

देखा है मैंने युनियन जैक को उतरते  
लाल किले की ऊँचाइयों पर तिरंगे को फहरते देखा है !
मैंने राजघाट पर किसी अपने को बिखरते देखा है !
मै  भारतवर्ष  हूँ !!

मैंने तो एक सी जमी दी नदी दी ;
फिर भी जात धर्मो को लड़ते देखा है ....!

संविधान को बनते देखा है !
दबी सहमी आवाज से विरोध का स्वर उभरते देखा है !
याद है, मुझे वो नक्शलवाड़ी का मंजर;फिर से ..
विद्रोह को सुनसान गलियों से गुजरते देखा है !

कुछ नहीं छुपा है मुझसे सफ़ेद कुरते वालो ;
दुधिया सफेदी पर अनदेखे दागों को देखा है !
मै  भारतवर्ष  हूँ !!

गौदमो में भरे आनाज को नेताओ के राज को ;
मेने बच्चो की भूख और भूखो की लाश को देखा है !

काली रात को गुजरते सुबह को सवारते देखा है !
मैंने चन्द्रयान को आकाश की ऊंचाई को छुते ;
और ब्रमोश से आकाश को भय खाते देखा है !
तकनिकी में मेरे बच्चो के सामने ;
दुनिया को झुकते देखा है !
मै  भारतवर्ष  हूँ !!

देखा है मेरे बच्चो को मेरी रक्षा में लड़ते हुए ;
उनके ही कोफिनो पर खाई दलाली को देखा है ! 
देखा है चारा अनाज और चावल खाते हुए ;
बोफोर्स और तकनिकी को चबाते देखा है ....!

मै  भारतवर्ष  हूँ !  
मैंने अर्जुन का बाण ,अशोक का मान
और अकबर का ज्ञान देखा है !
श्री कृष्ण का प्रबंधन चाणक्य का गठबंधन ;
पोरश का संघर्षण देखा है ....!

मै  भारतवर्ष  हूँ !!
मै  भारतवर्ष  हूँ !!

25 comments:

  1. मान, गुणगान, मायूसी, बेबसी,
    सबकुछ समाहित है रचना में !
    बहुत बेहतरीन रचना !
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!

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  2. मै भारतवर्ष हूँ !
    मैंने अर्जुन का बाण ,अशोक का मान
    और अकबर का ज्ञान देखा है !
    श्री कृष्ण का प्रबंधन चाणक्य का गठबंधन ;
    पोरश का संघर्षण देखा है ....!

    मै भारतवर्ष हूँ !!
    मै भारतवर्ष हूँ !!
    PAHALI BAR APKE BLOG TK PAHUCHA HOON ... VAH KYA KHOOB LIKHA HAI AP NE ...ABHAR KE SATH HI BADHAI;.

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  3. Thanx, aap mere blog par aaye apne vicharon se bhi avgat kraya gya.apki rachna behad achhi lagi apne bharat ki kahani uski vedna uaska gorav sbhi kuchh to mahsus kiya .member ban rhi hon . aapka mere blog par sdaev svagat hae .

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  4. khubsurat rachna..aap mere blog par aaye aapka abhar....

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  5. सुंदर समर्पित भाव से लिखी बहुत सुंदर रचना,...बेहतरीन पोस्ट
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये,...

    नई रचना "काव्यान्जलि":

    नही सुरक्षित है अस्मत, घरके अंदर हो या बाहर
    अब फ़रियाद करे किससे,अपनों को भक्षक पाकर,

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  6. आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !
    बहुत सुन्दर रचना ! दिल को छू गई हर एक पंक्तियाँ !

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  7. बहुत ही सार्थक व सटीक अभिव्‍यक्ति
    कल 04/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, 2011 बीता नहीं है ... !

    धन्यवाद!

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  8. काली रात को गुजरते सुबह को सवारते देखा है !
    मैंने चन्द्रयान को आकाश की ऊंचाई को छुते ;
    तकनिकी में मेरे बच्चो के सामने ;
    दुनिया को झुकते देखा है ! this are somuch appreciating lines... i liked it whole...... and proud to be an indian

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  9. राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव से प्रेरित हो
    kahe गए विचार
    प्रभावशाली हैं

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  10. देस के नाम कुछ खूबसूरत पंग्तियाँ

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  11. हे भारत वर्ष
    सब कुछ देखा तो यह भी देखो
    देखो कैसे अपने ही आज लूट रहे
    कैसे आतंकी धर्मभेष में छूट रहे
    कैसे गांधी की टोपी आज लुटेरों के सर पर भी है।
    कैसे मजाक उड़ता अनेक प्रजातंत्र का युवराज
    जनता जर्नादन के घर पर भी है।
    देखो आज कैसे हाकीम की नहीं है चलती।
    देखो आज की कैसे रक्षक ही अस्मत को मलती।
    हे भारती देखो तुम कैसे आज अन्नदाता है
    पेट पकड़ कर सो जाते।
    और कहीं पिज्जा खा खा कर कारोबारी नहीं अधाते।

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  12. बहुत अच्छे...
    अब जो थोडा बहुत अच्छा है भारतवर्ष में,उस पर भी ज़रूर लिखिए..
    घबराहट सी हुई इस सटीक रचना को पढ़ कर.
    सादर.

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  13. सामयिक रचना...

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  14. आपकी रचना ने मुझे रोमांचित कर दिया .. रेशे रेशे में आग है

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  15. भारत वर्ष की कहानी - भारतवर्ष की जुबानी... सचमुच अभिभूत कर गयी यह रचना!!

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  16. Aapne bharat ka varnan bahut gahrai se kia hai..

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  17. beautiful thoughtful poem
    नववर्ष की शुभकामनाएँ

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  18. दिल में उतर गई आपकी रचना...
    नया साल मुबारक हो ...

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  19. very touching poem its a gr8 work dat u have done

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  20. बेहतरीन रचना !
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!

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  21. बहुत अच्छी प्रस्तुति,भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति ......
    WELCOME to--जिन्दगीं--

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  22. मैंने अर्जुन का बाण ,अशोक का मान
    और अकबर का ज्ञान देखा है !bahut achcha.

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  23. नव वर्ष पर सार्थक रचना
    आप को भी सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

    शुभकामनओं के साथ
    संजय भास्कर

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  24. वतन पे मिटने वालो को देखा है ..... मै भारत वर्ष हूँ

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