dayra

Friday, 9 December 2011

काव्य जगत....

हर प्रयास पर उमड़ता विश्वास ,
हर बात पर जीत के जज्बात ;


ये खेल है कोमल शब्दों का 
कलमों से खेला जाता है 
मन के उन्मुक्त भावों को .....!!!

कल्पना के प्रवाहों को 
पन्नों पर उढेला जाता है ....!!!

शब्दों की नाजुक कलियों पर 
भवरों सा मंडरा मंडरा कर 
फूलों सा खिलाया जाता है ...!!!

मधुबन में बड़े जतन से 
एक एक फूल इकट्टा कर 
दुनिया को मधु पिलाया जाता है ...!!!

मिटती लहरों की निशानियों को 
रेत पर उभरी कहानियों को ;
शब्दों में में उतरा जाता है ...!!!

सागर के खारे पानी को 
देवों पर चढ़ाया जाता है .....!!!

अंगारों की क्या बात करे 
पत्थर के टुकड़ों को 
चमकते हीरों में सवारा जाता है .....!!!

ये काव्य जगत है प्यारे ,
यहाँ सूरज को भी पानी में डुबोया जाता है ....!!!

26 comments:

  1. yeh kavya jagat ki hi mehrbani h ki aaj hum dayra jaise page ka anand le rahe h ,,,,,,

    thanx to god for making nature who brings thought on poets mind .... and this is also a awsm poem

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  2. अंगारों की क्या बात करे
    पत्थर के टुकड़ों को
    चमकते हीरों में सवारा जाता है .....!!!very nice.

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  3. अंगारों की क्या बात करे
    पत्थर के टुकड़ों को
    चमकते हीरों में सवारा जाता है .....!!! Bahut khoob.

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  4. शब्दों की नाजुक कलियों पर भवरों सा मंडरा मंडरा कर फूलों सा खिलाया जाता है ...!!!
    wah.....bahot sunder.

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  5. सुन्दर अभिव्यक्ति के लिये बधाई स्वीकृत करें।

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  6. मधुर्य गुण की ये रचना मन को छू गई ..!
    मेरे ब्लॉग पे आपका हार्दिक स्वागत है !

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  7. आह काव्य जगत को कितनी सुंदरता से परिभाषित किया है. आनंद आ गया पढकर.

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  8. काव्य जगत की
    बात निराली
    कितनी रश्मियाँ रच दे एक कलम
    सुनहरी स्याही वाली

    सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  9. काव्य जगत पर बहुत सुन्दर प्रस्तुति ... मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार

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  10. आपका पोस्ट पर आना बहुत ही अच्छा लगा मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  11. अच्छी कविता भाई बधाई और शुभकामनाएं |

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  12. ये काव्य जगत है प्यारे ,
    यहाँ सूरज को भी पानी में डुबोया जाता है ....!!!

    एक सुन्दर कविता प्रस्तुति के लिए आभार...मनभावन हार्दिक शुभकामनायें

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  13. मधुबन में बड़े जतन से
    एक एक फूल इकट्टा कर
    दुनिया को मधु पिलाया जाता है ...!!!
    sunder bhav
    rachana

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  14. dayra apne boundaries ko badate ja raha hai........... ek din ye asman ki hights ko chu lega ........i wish

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  15. कविता का दायरा सुन्दरता से बताया है ...!!

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  16. ये काव्य जगत है प्यारे ,
    यहाँ सूरज को भी पानी में डुबोया जाता है ....!!!वाह वाह वाह …………बेहतरीन अभिव्यक्ति।

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  17. Wah...bahut khub sir...

    blog template bahut pasand aaya...kafi prakritik hai:-)

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  18. यहाँ सूरज को भी पानी में डुबोया जाता है ....!!!

    क्या बात है.... बहुत सुन्दर
    सादर

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  19. वाह ...बहुत ही बढि़या।

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  20. ये काव्य जगत है प्यारे ,
    यहाँ सूरज को भी पानी में डुबोया जाता है ....!!!

    vah ....kya kahun ....bs ak vaky.... kya khoob likha hai ashok ji apne.

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  21. यहां सूरज को भी पानी में डुबोया जाता है --वाह! क्या बात है अशोक जी -

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