महसूस करता हु में रात की ठंडी सांसों को,
.........जैसे अब ये कमजोर पड़ने लगी है !
सुनता हूँ मै सन्नाटों मै गूंजती आवाजे ;
अब ये बर्फ सी जमने लगी है !

देखता हु............ मै काले बदल को पिघलते हुएं ;
सारी धुन्धलाहत ओस की बूंदों में उतरने लगी है ;
हल्की सी जय ध्वनी आती है..... मेरे कानों तक ;मेरे कदमो की गति अब बदने लगी है !
जैसे किसी चोटी से मंजिल का नजारा हो ;
...........जैसे स्वर्ग को धरती ने पुकारा हो ;
जैसे उल्लुओ के आगे अँधेरा छाने लगा ;
जैसे भोर की राह में पपीहा गाने लगा ;
हर लम्हे की आहत को हर पदचाप को सुन सकता हु मै ,
उसके मिलने की ख़ुशी में....... हर गम भूल सकता हु मै,
लगता है........ जैसे अब पंछी चाह्चाहयेगे ;
जैसे कोमल लतिकाए अंगड़ाई लेने लगी है !
पर अँधेरा अभी छठा भी नहीं है,रास्ता अभी कटा भी नहीं है !
पूरब से आती हवाए , सूरज का सन्देश लायी है
ठंडी पवन है पर इसने तो मुझने गर्मी जगाई है !
लगता है जैसे सबेरा होने को है........!
सबेरा होने को है....!
♥
ReplyDeleteलगता है जैसे सवेरा होने को है........!
सवेरा होने को है....
आपकी कविता पढ़ कर यह लगता भी है अशोक बिरला जी !
बहुत ख़ूब !
…और भी श्रेष्ठ सृजन के लिए मंगलकामनाएं हैं …
साथ ही
आपको सपरिवार त्यौंहारों के इस सीजन सहित दीपावली की अग्रिम बधाई-शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !
-राजेन्द्र स्वर्णकार
its really good... if everyone in this world think like this ... then there are no problem that can not be solved by human .....
ReplyDeleteदेखता हु............ मै काले बदल को पिघलते हुएं ;
ReplyDeleteसारी धुन्धलाहत ओस की बूंदों में उतरने लगी है ;
Behtareen Likha hai aapne ...
My Blog: Life is Just a Life
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Achhi kavita.
ReplyDeletebilkul savera hoga..
ReplyDeletebahut khub likha bhai,,,
jai hind jai bharat
haa yaar tu to kavi ban gaya ab ....................... dekho engg. ke fayde acha khasa admi kya kya ban jata hai
ReplyDeletekeep it up ...............my always with u
ReplyDeleteaisa lagta hai mano waqt tham sa gaya hai....aur is thame huai waqt main ye moti ki bunde gir rahi hai......
ReplyDeleteso beautiful...
Aapki Kavitaayen padkar yun lagta hai ki aapko apne samne bithaaun aur bas aapko sunta hi chala jaaon.
ReplyDeleteGreat Work!
हर लम्हे की आहत को हर पदचाप को सुन सकता हु मै ,
ReplyDeleteउसके मिलने की ख़ुशी में....... हर गम भूल सकता हु मै,
सबसे पहले तो आपसे क्षमा चाहूँगा देर से आने , खूबसरत अहसास को अल्फाज़ दे दिए आपने
दूसरी बात हु की जगह हूँ कर लें | इसके लिए फिर माफ़ी
कुछ अलग सा लगा ....
ReplyDeleteशुभकामनायें आपको !
जैसे किसी चोटी से मंजिल का नजारा हो ;
ReplyDelete...........जैसे स्वर्ग को धरती ने पुकारा हो ;
जैसे उल्लुओ के आगे अँधेरा छाने लगा ;
जैसे भोर की राह में पपीहा गाने लगा ;
bhut hi achchi rachna.
कोमल एहसास के साथ बहुत ख़ूबसूरत रचना! शानदार प्रस्तुती!
ReplyDeleteबहुत ख़ूबसूरत रचना!
ReplyDeleteआपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को दिवाली की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
सार्थक रचना, सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें.
ReplyDelete"शुभ दीपावली"
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मंगलमय हो शुभ 'ज्योति पर्व ; जीवन पथ हो बाधा विहीन.
परिजन, प्रियजन का मिले स्नेह, घर आयें नित खुशियाँ नवीन.
-एस . एन. शुक्ल
आप सभी प्रबुद्ध व्यक्तियों का स्वागत है ! आपका धन्यवाद की आप इस ब्लॉग पर पधार कर मुझे आशीष रूपी वचनों से लाभान्वित किया !
ReplyDeleteलगता है जैसे सबेरा होने को है........!
ReplyDeleteसबेरा होने को है....!bhaut hi khubsurat.... panktiya... sundar blog....
कुछ हट कर है अभिव्यक्ति आपकी. अच्छा लगा.
ReplyDeletegahan bhawon ko jagati......komal kavita.
ReplyDeleteपर अँधेरा अभी छठा भी नहीं है,रास्ता अभी कटा भी नहीं है !
ReplyDeleteपूरब से आती हवाए , सूरज का सन्देश लायी है
सकारात्मक सोच लिए हुए अच्छी प्रस्तुति
सवेरा हो..!
ReplyDeleteआशावादी सोच रखने से जीवन रह सुगम बनी रहती है ..... उत्तम रचना !
ReplyDeleteमहसूस करता हु में रात की ठंडी सांसों को,
ReplyDelete.........जैसे अब ये कमजोर पड़ने लगी है !
सुनता हूँ मै सन्नाटों मै गूंजती आवाजे ;
अब ये बर्फ सी जमने लगी है ....
शिल्प बहुत अच्छा बुना है आपने
पर वर्तनी की गलतियां बहुत हैं ...
पर अगर हाथ में हुनर है तो मंजिल दूर नहीं ....
जैसे किसी चोटी से मंजिल का नजारा हो ;
ReplyDelete...........जैसे स्वर्ग को धरती ने पुकारा हो ;
सुन्दर प्रस्तुति.
behtreen likha hai...
ReplyDeletejai hind jai bharat
bhaut hi sundar abhivaykti.....
ReplyDeleteसुन्दर चित्र !
ReplyDeleteबहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति...
ReplyDeleteवाह पहली बार पढ़ा आपको बहुत अच्छा लगा.
आप बहुत अच्छा लिखते है आप और गहरा भी.
बधाई.